Tuesday, 16 June 2026

बतियाँ मैं कैसे कहूँ...

 

पहली छवि


बतियाँ मैं कैसे कहूँ, कही ही न जाए।

कहत बरे ज्यों ख्याल करत हौं

मनवा बेग बढ़ाए।।

 

का करूँ? पिया जू प्रान हमारी,

प्रान लिहो, मोहि चित से उतारी।

जाको दरस परस दिन राती,

ओहि बिन जिया न जाए...

 

बतियाँ मैं कैसे कहूँ, कही ही न जाए।

कहत बरे ज्यों ख्याल करत हौं

मनवा बेग बढ़ाए।।

 

पल-पल छिन-छिन तन काँपत है,

औषध आवस दर नापत है।

मुकुर मोर चिटकन लाग्यो है,

अँसुअन अमित बहाए...

 

बतियाँ मैं कैसे कहूँ, कही ही न जाए।

कहत बरे ज्यों ख्याल करत हौं

मनवा बेग बढ़ाए।।