सच्चे यारों की यही बाक़ी है आदत!!
Monday, 29 May 2023
Friday, 3 March 2023
वक़्त
लौट आ ऐ वक़्त मेरे,
इतना आगे क्यूँ गया है
चल पलटकर देख ले, सामान
मेरा खो गया है
ज्येष्ठ के मानिंद मेरा,
तप रहा देखो हृदय
रीते पहलू ना सुहाते, भर
रहे हैं घोर भय
आज उनको याद करके होश
मेरा खो गया है...
चल पलटकर देख ले, सामान
मेरा खो गया है।
लौट आ ऐ वक़्त मेरे... (1)
सब तलातुम खो गये हैं,
ज़िन्दगानी में कहर
छूटा दर जब वो ठिकाना,
हर तरफ़ तपती सहर
हूँ कहाँ अब मस्त वैसा, मुझको
कुछ तो हो गया है...
चल पलटकर देख ले, सामान
मेरा खो गया है।
लौट आ ऐ वक़्त मेरे... (2)
उनकी शोख़ी इक वबा थी,
जिसकी कोई ना दवा थी
हरती रहती रोग सारे, सच
कहूँ वो क्या सबा थी
दूरियाँ जो हैं मयस्सर,
गिर-हुलस सब ढह गया है...
चल पलटकर देख ले, सामान
मेरा खो गया है।
लौट आ ऐ वक़्त मेरे... (3)
Sunday, 2 October 2022
साँझ गुलाबी...
अर्रे धीमे-धीमे
इश्क़ में गुइयाँ शर्माती है।
हाय! इनकी
शरारत साँझ गुलाबी कर जाती है।।
स्निग्ध लताएँ पक
जाती हैं
गुच्छे डलियाँ लद
जाती हैं
सौ-सौ बार मरन हो
अपना
ऐसा प्रिय-वो मुसकाती
हैं
मधुरेचक इतने
मँड़राते...
सारी गलियाँ थक जाती
हैं।
धीमे-धीमे... (1)
बदरे उमड़-घुमड़ करते
हैं
जाने क्या बेताबी है
आफ़ताब की चौखट बैठे
मौसम कुछ मेहताबी है
सुन्दर गंध सुहानी इतनी...
जान चली ही जाती है।
धीमे-धीमे... (2)
आसमान में आग लगी है
बुझती नहीं बुझती है
जो पीड़ा तपती है मन
में
यूँ ही बरन-न जाती है
गिरे झमाझम बारिश ऐसे...
कुल-बगिया सुलगी जाती
है।
धीमे-धीमे... (3)
-अमित राजपूत
Friday, 9 September 2022
अवधी गीत: तुम बिन जी...
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| चित्र: साभार |
दिल्लगी दिल से ना की, हमको मरने ना दिया!!
तुम बिन जीऽ नहीं, जाये गुजरिया!
सच कहूँ मान, रे हाय सुपिरिया!!
नित-नित इत-उत, कहाँ मँझाऊँ!
चैन ना कतो ढिग, कहाँ को जाऊँ
तड़पूँ अस जस, जेठ मछरिया!!
तुम बिन... (१)
सरपत जइसे, चाक करत है,
जइसे रहि रहि, घाव सरत है!
वइसे तिन-तिन, जिगर झरत है
हाल कहूँ अरु, का रे दुलरिया!!
तुम बिन... (२)
अपने गत की, आप मालकीं,
मोरे गति की, तुमहिं सारथी!
कहो उतारूँ, नित्य आरती,
केहु पट चैन न, तोहे सुथरिया!!
तुम बिन... (३)
Saturday, 3 September 2022
ग़ज़ल
बज़्म से दूर चला जाये...
बज़्म से दूर चला जाये, यहाँ रक्खा क्या है!!
थक गया हूँ पीते-पीते, जाम इन मय-कदों के!
क़ायदे से कोई, नया जाम लाया जाये।
उतरे नहीं नशा, कोई ला पिला दे ऐसी,
इन घूँट-घूँट झूठे, इंतेज़ाम में क्या रक्खा है...
बज़्म से दूर चला जाये, यहाँ रक्खा क्या है!! (१)
हुस्न-ए-साकी के अलावा, अच्छा क्या है!
बज़्म से दूर चला जाये, यहाँ रक्खा क्या है!!
तसव्वुफ़ का मकाँ माना, ऐ जाना! बादाख़ाना है- मगर
तलातुम ज़िन्दगी में हो, तो मैख़ाने सुहाते हैं कहाँ,
चले आओ! चलें हम-तुम लड़ाते जाम अपना हैं
बाक़ी झाम दुनिया के, यहाँ रक्खा क्या है...
बज़्म से दूर चला जाये, यहाँ रक्खा क्या है!! (२)
हुस्न-ए-साकी के अलावा, अच्छा क्या है!
बज़्म से दूर चला जाये, यहाँ रक्खा क्या है!!
मज़ा है बैठकर पीना, सनम के पहलुओं में म्याँ
मगर पहलू पिया का बैठकर, पीने को मिलता है कहाँ!!
लबों से इक जो प्याला, कर दिया जूठा,
तो दूजे बर्तनों की चाह में रक्खा क्या है...
बज़्म से दूर चला जाये, यहाँ रक्खा क्या है!! (३)
हुस्न-ए-साकी के अलावा, अच्छा क्या है!
बज़्म से दूर चला जाये, यहाँ रक्खा क्या है!!
Tuesday, 30 August 2022
चउदा ईंटन का बोझ
काम पकरि लेव, लगि लेव धंधेतजि माया अरु लोभ!उमर बीस बीती है जब से,सुना रहे हैं लोग!!
सुना रहे हैं लोग समय है बुरा ज़माना,दिल्ली जाकर देखो ख़ाली पड़ा ख़ज़ाना।सड़े पखाने जइसी क़िस्मत लेकरना रोना ऐ लोग...!काम पकरि लेव, लगि लेव धंधेतजि माया अरु लोभ!!उमर बीस बीती है जब से... (१)
एक गिद्ध जऊँ नोच के खाता,कोऊ-कोऊ खाता, नहीं बताता।इन-दोऊ गिद्धन केर मेर बराबरकरि लेव चाहे शोध...काम पकरि लेव, लगि लेव धंधेतजि माया अरु लोभ!!उमर बीस बीती है जब से... (२)
बाप खवाएन दही औ माठाहमको चउआ दुहेन न आता।बाप बराबर कभौ न होइहौपकिरौ आपन-आपन माथा।।लपकौ चाकरी छोर छोकरीआलस छोरि सुबोध...!काम पकरि लेव, लगि लेव धंधेतजि माया अरु लोभ!!उमर बीस बीती है जब से... (३)
करौ सिलाई चहे कढ़ाईकढ़ाई पे चाहे तलौ पकउरा।नीकेन कहने प्रधान प्रवर हो!सबेन मा गरुवाई पखउरा।पढ़े क कहतें कहाँ से भैवाख़ुदौ तो चहिए बोध...काम पकरि लेव, लगि लेव धंधेतजि माया अरु लोभ!!उमर बीस बीती है जब से... (४)
कविन की मानौ बुइया बच्चाकरौ पढ़ाई तो अच्छेन अच्छा।नहीं तो चुप्पे उद्दिम पकिरौखइहौ रोज़ पराठा लच्छा।बात करू है, सुनि लेव बाबू!समझो नहीं विनोद...बहुत गरू होता है पीठ परइन चउदा ईंटन का बोझ!! (५)
-अमित राजपूत





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